आयुर्वेद के अनुसार, शहद को कैसे इस्तेमाल करें ( According to aayurved, how to use honey )

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क्या आप वजन कम करने के लिए शहद और गर्म पानी पीते है।     

आजकल हर कोई हमें सलाह देता है कि वजन कम करने के लिए, चर्बी या मोटापा कम करने के लिए सुबह खाली पेट हमे शहद और निम्बू को गरम पानी के साथ लेना चाहिए और फिर इंटरनेट पर दिखाए गए ऐड्स में या टीवी पर भी हमे शहद के इतने फायदे बताए जाते हैं। हर एक चीज में शहद को मिक्स करने के लिए बताया जाता है। जैसे गर्म दूध के साथ, ब्रेड पर लगाने के लिए, रेसिपीज में बाकी खाद्य पदार्थों के साथ मिक्स करने के लिए, बहुत सारी चीजें हमें बताई जाती है लेकिन सही जानकारी क्या है। आयुर्वेद शास्त्र में इसके बारे में क्या बताया है

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आयुर्वेद शास्त्र में आचार्य चरक और आचार्य सुश्रुत ने मधु या शहद के बारे में बहुत विस्तार से वर्णन किया है।

  1. शहद के प्रकार कितने है ?
  2. कौन से मधुमक्खियों ने बनाया हुआ शहद सर्वश्रेष्ठ है ?
  3. उसके गुण कौनसे है? किसने उसका सेवन करना चाहिए ?
  4. किस अवस्था में करना चाहिए कितनी मात्रा में करना चाहिए ? और
  5. इसके सेवन की विधि क्या है? अगर सही तरीके से ये ना किया गया तो क्या दुष्परिणाम हो सकते हैं। इन सबके बारे में उन्होंने वर्णन किया है।

आचार्य सुश्रुत ने सुषमा संहिता का 45 वा अध्धाय यानि द्रव्य द्वितीय अध्याय में मधुर वर्ग में हमें बताया है 

इसका मतलब है मधु यानि शहद इसमें मधुर हैं। इसका कषाय अनुरस है, रुक्ष, शीत गुणों वाला है अग्नि को बढ़ाने वाला है वर्ण को बढ़ाने वाला है। पचने में एकदम हल्का है। लेखन कर्म करने वाला है कफ और मदों में  वृद्धि को नष्ट करने वाला है और योग वाही है। योग वाही का मतलब है जिस औषधि द्रव्य के साथ आप इसको मिक्स करेंगे उसके गुणों को बढ़ाने वाला है तो इन सब गुणों का आचार्य सुश्रुत ने वर्णन किया है।

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मधुमक्खी के आपक वैज्ञानिक कच्चे छत्ते को तोड़कर जो शहद निकाला जाता है वो खट्टा रहता है त्रिदोष का वर्धन करने वाला । यानि हमारे लिए सही नहीं रहता। लेकिन जो पुराना है उसको लेखन कर्म करने वाला या मेध धातु चर्बी को कम करने वाला बताया गया है कि शहद का सेवन हमें कैसे करना है तो सुबह शहद को हम पानी के साथ ले सकते हैं लेकिन उसके लिए आपको पानी उबालना है अगर आपने एक लीटर पानी उबाला तो उसको पाव् लीटर या उससे भी आधा में बचाना है और फिर उसके साथ उसको पूरा ठंडा होने देना यानि उसको नॉर्मल टेम्प्रेचर पर आने देने के बाद ही उसके साथ आपने शहद मिक्स करके लेना है। हमें दो फायदे मिलेंगे। एक तो ये जो पानी में उबाल के लिया है वो पचने में बहुत हल्का है ये भी कफ को कम करने वाला है चर्बी को कम करने वाला है और दूसरे शहद के भी फायदे हमें मिल सकते हैं। अब देखते हैं कि आयुर्वेद में शहद को गर्म पानी के साथ लेने के बारे में क्या बताया है। तो आचार्य सुश्रुत सुश्रुत संहिता में हमें बताते हैं 

यानी इसका मतलब है शहद को कभी भी गरम नहीं करना है और गर्म चीजों के साथ भी इसे कभी नहीं लेना है। यहां तक कि गर्म ऋतु में शरद ऋतु या फिर गर्मी याने ग्रीष्म ऋतु में जैसे मार्च के महीने तक या फिर अक्टूबर महीने में भी हमें इसका प्रयोग नहीं करना है। यहां तक कि जिनको उष्णता से होने वाली कुछ बीमारियां है उन लोगों ने भी इसका प्रयोग नहीं करना है। 
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आयुर्वेद में पंचकर्म चिकित्सा में वमन क्रिया में शहद को गरम काढ़ा या द्रव्य के साथ हम इस्तमाल करते हैं लेकिन उसमें शहद का पाचन होने के पहले ही उल्टी के द्वारा शरीर से बाहर निकल जाता है तो इसलिए उसके शरीर पर कोई दुष्परिणाम नहीं होते। आचार्य चरक ने सूत्र स्थान के 27वें अध्याय में बताया है कि उष्ण मधु मृत्यु कारक है देखें मधुमक्खियां स्वयं एक विषैला जीव है और जिन फूलों से ये इकट्ठा करती है उसमें से भी काफी सारे विषैले हो सकते हैं और इन सबका प्रभाव जो शहद बनेगा उसके ऊपर भी आएगा और अगर यह शहद उष्ण पदार्थों के साथ या जो व्यक्ति उष्णता से पीड़ित है उसने लिया तो उसको निश्चित ही उसके कुछ दुष्परिणाम हो सकते हैं। शहद का प्रयोग हमें बहुत कम मात्रा में करना चाहिए क्योंकि  अगर हमने इसे अधिक मात्रा में लिया और उससे अजीर्ण हुआ या ठीक से पाचन नहीं हुआ तो इसके नुकसान ही ज्यादा होंगे। एक बात और है कि वजन कम करने के लिए सिर्फ शहद और गरम पानी काफी नहीं है तो इसके लिए खान पान की कुछ आदतें है शारीरिक व्यायाम है औषधि चिकित्सा पंचकर्म चिकित्सा । इन सबकी सलाह ले सकते हैं। तो देखा आपने आयुर्वेद ने शहद को गरम पानी के साथ लेने के लिए बिलकुल नहीं बताया है। इसके बाद भी अगर आपको ये बताता है तो उनको रेफरेंस  जरूर पूछें उनको ये पूछें कि आयुर्वेद के कौनसे आचार्य ने किस ग्रन्थ में ये बताया है। अगर आपको पता चला तो हमें ज़रूर बताइए। फिर मिलेंगे अगली लेख में आयुर्वेद को अपनाएं, और स्वस्थ रहे, नमस्कार।

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