जाने कान में तेल कैसे डालें – कर्ण पूरण -Know Perfectly How To Put Oil In Ear

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नमस्कार मैं आरोही सोनी हिंदी अयुर में आपका स्वागत है। आज के ब्लॉग का हमारा विषय है कर्ण पूरण( कान में तेल डालने ) के फायदे, इसकी विधि से संबंधित पूरी जानकारी आप ब्लॉग में जानिए। 

कर्ण पूरन कैसे करना है ?

इसके शास्त्रोक्त विधि क्या है ? 

इसके लिए कौन कौन से द्रव्यों का या फिर किस औषधियों का प्रयोग कर सकते हैं। इसके फायदे क्या हैं ?

इन सबके बारे में इस ब्लॉग में जानेंगे। पूरी जानकारी के लिए इस ब्लॉग को पूरा पढ़िए। जानिए आयुर्वेद में शरीर पर तेल लगाना या तेल की मालिश करना जिससे अभ्यंग  कहा गया है इसका बहुत महत्व बताया है। 

आचार्य वाग भट ने दिनचर्या अध्ययन में हमें बताया है। इसका मतलब क्या है अभ्यंकर। आचार्य नित्या ने हमें हर रोज अभ्यास करना है हर रोज शरीर पर तेल लगाना है। इसके बहुत सारे फायदे भी उन्होंने बताया है कि अगर आपकी अभंग करते हैं तो जो बुढ़ापा है वो देर से आता है।

युवावस्था बनी रहती है अगर शरीर में थकान है, आपको बहुत थकावट महसूस होती है या फिर आंखों की रोशनी भी बढ़ती है। कर्ण पूरण करने से सभी इंद्रियां अच्छी रहती है, तो कर्ण पूरण से आपको बहुत सारे फायदे हैं, उनकी लंबी उम्र रहती है तो इन सब फायदों के लिए तो हमें हर रोज कर्ण पूरण करना है। 

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लेकिन अगर आप पूरे शरीर को तेल नहीं लगा सकते तो शरीर में ऐसे तीन स्थान उन्होंने बताया है कि वहां पर डोपिंग (dropping) का प्रयोग मिट्टी ज़रूर करना है। वो कहते हैं । 

शीर्ष श्रवण आदेशों तम विशेषज्ञ नशीले यानि सिर पर तेल लगाना ही कानों में तेल डालने से कानों में तेल लगाना नहीं कानों में डालना है और पारे यानि पांव के तलवों में तेल लगाना है तो आज इसमें से हम कर्ण पूरण यानि कान में तेल डालने के क्या फायदे हैं इसके बारे में जानेंगे। 

देखिए अगर आप कान की जो संरचना देखेंगे,

कर्ण पूरण

तो इसके तीन भाग बताए गए हैं, एक्सटर्नल, मिड्ल और इनरवेयर l जो इनर कान का जो अंदर का भाग है उसमें छोटे छोटे तीन बोन्स रहते हैं और इनकी फाइन मूवमेंट्स हमेशा चलती रहती है l 

तो इसे कान के अंदर ही वात दोष भी रहता है, तो ये उपकरण पुराने विवाद का शमन करने वाला है। इसके साथ ही जो इन्द्रियां है, इसको स्वस्थ रखने वाला उसका जो प्राकृत कार्य है, उसको बनाए रखने वाला और अगर कान से संबंधित कोई भी विकार होता है l

तो उसको भी यह दूर करता है, इसके साथ और भी काफी सारे फायदे हमें इसके मिलते है l इसके बारे में भी हम आगे जानेंगे। देखिए कर्ण पूरण सिर्फ आयुर्वेद ने ही नहीं बताया है, बल्कि ये हमारी भारतीय परंपरा का हिस्सा है। 

आपमें से हर किसी ने कभी न कभी कान में तेल जरूर डाला होगा। आजकल डॉक्टर्स इसे करने के लिए मना करते हैं, लेकिन मॉर्डन साइंस में इसका उल्लेख नहीं है, और कभी कभी ये भी रहता है कि इसमें अगर आप अशुद्धता, अगर उसमें नहीं की गई शुद्धता का पालन किया गया और इन्फेक्शन हुआ, तो ये भी अच्छा नहीं है तो काफी बार इसके लिए भी मना किया जाता है l लेकिन इसको करने में हमे शुद्धता का पूरा ध्यान रखना है, तो आपको इसके फायदे जरूर मिलेंगे। इसके लिए जो भी तेल का इस्तेमाल करते हैं वो कच्चा तेल, सरसों का तेल, तिल का तेल कोई भी अगर तेल का चाहे तो उसको अच्छे से गरम करके लेना है 

और फिर उसको हल्का गुनगुना होने तक रखना है उसके बाद ही उसका कान में डालने के लिए भी इस्तेमाल करना है। साथ ही ये देखना भी जरूरी है कि जो तेल, आप प्रयोग कर रहे हैं, उसको अच्छी तरह से पहले रखा गया हो या इसमें धूल मिट्टी या कचरा ना हो l

इसके साथ ही अगर आप उसके लिए चम्मच इस्तेमाल करते हैं। तेल को कान में डालने के लिए तो वो भी बहुत साफ सुथरा होना चाहिए। खासकर अगर आप छोटे बच्चों को कर्ण पूरण करा रहे हैं तो उसके लिए तो ये सावधानी बरतना जरूरी है। 

सिर्फ कर्ण पूरण करते समय एक बात का हमें ध्यान रखना है अगर किसी को कान के पर्दे में छेद हो तो फिर उन्होंने और उसमे से अगर स्राव आता हो पानी बहता हो तो उन्होंने कर्णपुरा नहीं करना है उन्होंने चिकित्सक की सलाह से दवाई का सेवन करना। 

अब जानते हैं कि कर्ण पूरण करना क्या सही इसकी विधि क्या है,

तो इसके लिए आपको करवट पे सोना है जैसे आपको इस कान में तेल डालना है तो बायीं करवट पर सोना है और उसके बाद ड्रॉप पर या चम्मच से बूंद बूंद तेल अंदर डाला ये तेल शुद्ध होना चाहिए। 

जैसे हमने आपको पहले बताया कि तेल को अच्छा गरम करके उसे गुनगुना होने दे और उसके बाद ही उसका प्रयोग करें। इस तेल को बून्द अच्छी मात्रा में डालें। तेल से इस तरफ का कान पूरा भरना चाहिए आप अगर देखें तो यहां तेल दिखना चाहिए l या फिर। चेक करो तो उंगली में वो तेल लगाना। इतनी मात्रा में तेल को अंदर डालना है और अगर आप मेडिकेटेड ऑयल या फिर किसी खास बीमारी के लिए तेल का प्रयोग कर सकते हैं तो इसको सिर्फ हां इसको डार्क हिटिंग टेक्निक आपने इस्तेमाल करेंगे l

तो इसमें अपने तेल गरम नहीं करना है, तो उसको गरम पानी एक कटोरी में लेकिन उसमें वो तेल रखना है वो अगर हल्का गुनगुना हो तो उसके बाद उसकी दो चार बूंदे या फिर चिकित्सकीय सलाह से आप उसका प्रयोग कर सकते हैं। जब भी आप तेल कान में डाले तो मुंह खोलना और बंद करना है 

तो इससे क्या होगा जो तेल है ये अच्छी तरह से अंदर जाएगा और फिर सौ गिनने तक इसको अंदर रखना ही आपसे चार पांच मिनट भी आप इसे रख सकते हैं, और उसके बाद एक खाली कटोरी आप पैसे रखे फिर उसको निकाल देना है 

जो तेल कान में जमा वो पूरा बाहर आ जाएगा जो भी तेल अंदर रह जाता है, उसको वैसे ही रहना देना है वो भी अच्छे से सूख जाएगा और जब निकालते समय अगर तेल बाहर भी लगता है तो उसको भी अच्छे से मालिश कर लेना हमारी गलती है या फिर ये जो जॉइंट रहता है l 

उसे टेम्पररी मेडिकल कहते हैं तो इसकी हलचल भी हमेशा दिनभर होती रहती है। जब भी हम बात करते है या फिर खाना खाते तो इसकी होती है तो इसके लिए भी महत्वपूर्ण है तो ये करने के बाद आपको मालिश करनी है उसके बाद आप हल्का सेक भी दे सकते हैं l

जैसे अगर आपने अजवायन दिया तो छोटी सी पोटली में और इसे सेक लिया तो ये भी आप कर सकते तो इस तरह कर्ण पूरण की पूरी विधि है। अब देखते है कि कर्ण पूरण के लिए में तेल कौनसा इस्तेमाल करना है तो आयुर्वेद अपने तेल को सर्वश्रेष्ठ बताया है। 

जाने कान में तेल कैसे डालें - कर्ण पूरण

यहाँ तक कि तेल शब्द भी तिल से ही बना हुआ है। कहा गया है कि तेलों। लेकिन आप तिल तेल के साथ सरसों का तेल या फिर नारियल का तेल, बादाम तेल इनका इस्तेमाल भी आप कर सकते हैं। यहां तक कि अगर कोई बीमारी अलग से यानि अगर किसी को कान में खुजली हो तो ये काफी बार फंगल इन्फेक्शन है 

तो उसकी वजह से भी खुजली हो सकती है तो इसके लिए आप करंज का तेल या नीम का तेल भी प्रयोग कर सकते हैं इसके साथ ही काफी सारे मेडिकेटेड ऑयल भी आते है जैसे बिन्दु तेल या फिर पंचेन श्रीवर्धन तेल अन्य तेल तो इनका प्रयोग भी आप चिकित्सकीय सलाह से कर सकते हैं। 

ये जो तेल हम डालते हैं इससे कान में अगर दर्द है किसी को तो वो भी तुरंत कम हो जाता है। आप इसके लिए आप घर में थोड़ा सा लहसुन लेकिन उसको तिल के तेल में अच्छा गरम करके जब तक वो जो लहसुन है वो हल्का उसका रंग जो है वो हल्का ब्राउन होने तक उसे भूना है l 

और फिर जो तेल है उसको छानकर हल्का गुनगुना होने पर उसका उपयोग करना है तो ये भी अगर कान में बहुत ज्यादा दर्द है तो भी उसको कम करने में बहुत मदद करता है। छोटे बच्चों में भी काफी बार कान में दर्द रहता है बच्चा बता तो नहीं सकता लेकिन बहुत रोता है 

तो इसमें भी आप उनके कान में तेल का प्रयोग कर सकते हैं। सिर्फ आपको शुद्धता का ध्यान रखना। बाकि तेल से आपको दूसरा कोई भी साइडइफेक्ट नहीं होगा तो इस तरह से कर्ण पूरण के लिए हम अलग अलग तेलों का प्रयोग कर सकते हैं। 

अब जानते हैं कि कर्ण पूरण के क्या क्या फायदे हैं,

तो ये जो कर्ण शिरोमणि इन्द्रिय ही इसका प्राकृत कार्य बनाये रखने के लिए कर्ण पूरण बहुत लाभदायी है। इसके साथ ही जिन लोगों को कान में दर्द या फिर वैक्स जमा है या फिर कान में खुजली है तो वो लोग कर सकते हैं। 

इसके साथ ही जिन लोगों को कान में आवाज आती है जिसे टिनिटस कहते हैं या जिन लोगों को बहरापन है कम सुनाई देता है। बोलो कैसे कर सकते हैं या फिर अगर किसी को गर्दन में दर्द सिर में दर्द हो तो वो भी इसे कर सकते हैं। इसका और फायदा बताया गया है। 

दोनों ग्रहों अनुसार किसी को अगर जबड़ा अकड़ जाता है तो वो लोग भी कर्ण पूरण कर सकते हैं उनको भी इसका लाभ जरूर मिलेगा। इसके साथ ही जो लोग बहुत ट्रैवल करते है या फिर जो लोग बहुत ज्यादा बात करते है या जिनका काम नाइट शिफ्ट में है 

Put Oil In Ear

तो वो लोग भी इसे कर सकते हैं उनको भी इससे बहुत लाभ मिलेगा। सिर्फ आपको एक बात का ध्यान रखना है कि जिन लोगों को कान के पर्दे में छेद है वहां से पानी या स्राव होता है उन्होंने कर्ण पूरण नहीं करना है 

तो आप कर्ण पूरण के सभी फायदों को जानते हुए अच्छी तरह से सावधानी से कर्ण पूरण जरूर कीजिए आपको इसका लाभ निश्चित मिलेगा तो इसे अपने दिनचर्या का हिस्सा बनाएं और इससे आपको कैसे लगा ये हमें भी जरूर बताइए। अगर आपको ये ब्लॉग अच्छा लगा तो हमे कमेंट में बताइए। फिर मिलेंगे ब्लॉग में। आयुर्वेद को अपनाएं स्वस्थ रहें।                    

 नमस्कार

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