जाने तुलसी के 20 उपयोगी फायदे – Know 20 Benifits of Basil leaves in hindi

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तुलसी के फायदे ( Benifits of Basil in hindi )

निमोनिया– तुलसी (Basil) के 20 हरे पत्ते और 5 कालीमिर्च पीसकर पानी में मिलाकर पिलाने से निमोनिया में लाभ होता है।

भोजन का पाचन-भोजन के बाद तुलसी (Basil) के ताजे पत्तों को पीसकर पानी मिलाकर पीने से अजीर्ण (भोजन न पचना) दूर हो जाता है। तुलसी के पाँच पत्ते नित्य सेवन करने से भोजन शीघ्र पचता है।

आधे सिर का दर्द-(1) यदि आधे सिर में दर्द हो जो सूरज के साथ घटता-बढ़ता हो तो चौथाई चम्मच तुलसी (Basil) के बीज पीसकर शहद में मिलाकर सुबह-शाम दो बार खायें।
(2) चौथाई चम्मच तुलसी के पत्तों का चूर्ण शहद के साथ सुबह-शाम चाटने से लाभ होगा। तुलसी के पत्ते 11, कालीमिर्च 11 मिलाकर खाने से सिरदर्द ठीक होता है। इसी को सूंघने से आधासीसी में लाभ होता है।

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सिरदर्द (Headache) – (1) तुलसी (Basil) के तीस पत्ते पीसकर एक चम्मच शहद में मिलाकर चाटने से सिरदर्द दूर हो जाता है। पुराने रोगी इसे एक, दो माह तक सेवन करें।

(2) तुलसी के तीस पत्ते, बारह कालीमिर्च और एक गाँठ लहसुन को छीलकर सबको पीसें। पीसते समय चौथाई चम्मच पानी डाल लें। फिर पिसी हुई लुगदी को पतले कपडे में लेकर निचोडकर शीशी में भर लें।

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इसे जोर से सूच। इससे पुराना सिरदर्द ठीक हो जाता है। सिरदर्द में होम्योपैथिक औषधियाँ लाभदायक है। होम्योपैथिक चिकित्सा के लिए लेखक की पुस्तक ‘होम्यो । व्यावहारिक चिकित्सा-सार’ पढ़ें। तुलसी (Basil) के पत्ते छाया में सुखाकर रख लें। इन्हें पीस लें।
इसे सिरदर्द के रोगी को सुंघाने से पीड़ा शान्त हो जाती है तथा पागलपन की उत्तेजना ठीक होती है। तुलसी के पत्तों का रस और नीबू का रस समान मात्रा में पीने से सिरदर्द दूर हो जाता है।

बच्चों के दाँत निकलने पर तुलसी (Basil) के पत्तों का रस चाशनी या शहद में मिलाकर मसूढ़ों पर थोड़ा-सा चटा दें। बिना कष्ट के दाँत निकल आयेंगे।

दाद और ज्वर (Ringworm and fever)-दो चम्मच तुलसी के पत्तों का रस पीने से लाभ होता है।

Benifits of Basil leaves

बच्चों के दस्त (Children’s diarrhea) -तुलसी और पान का रस समान मात्रा में गर्म करके पिलाने से बच्चों के दस्त साफ आते है, पेट फूलना, आफरा ठीक हो जाता है।

दाँत निकलना (Teeth Teeth) – तुलसी (Basil) के पत्तों का रस शहद में मिलाकर मसूढ़ों पर लगाने से और थोड़ा- चाटने से दाँत बिना कष्ट के निकल आते हैं। तुलसी के पत्तों का चूर्ण अनार के शर्बत साथ देने से भी दाँत सरलता से निकल आते हैं। सिरदर्द, दाद और ज्वर-तुलसी के पत्ते का रस 12 ग्राम नित्य पियें।

हैजा, दाँत दर्द (Cholera, tooth ache) – तुलसी की पत्ती और कालीमिर्च को पीसकर गोली बना लें। इसे देखते दाँत के नीचे दबाये रखने से दाँत दर्द शान्त हो जाता है। इसी गोली को खाने से हैजा ठीक होता है। तलसी के पत्ते दाँतों से चबाकर खाने से दाँत मजबूत होते हैं और मुंह की बदबू दूर होती है।

पेचिश (Dysentery)-तुलसी की पत्ती को शक्कर के साथ खिलाने से पेचिश दूर हो जाती है। पेटदर्द में तुलसी और अदरक के रस को एक-एक चम्मच सम भाग लेकर गर्म करके या ठंडा ही पीने से लाभ होता है। तुलसी (Basil) का 12 ग्राम रस पीने से पेट की मरोड़ ठीक हो जाती है।

दस्त (Diarrhea)- (1) तुलसी के पत्तों का काढ़ा पीने से दस्त में लाभ होता है। तुलसी के पत्तों का
दस ग्राम रस नित्य पीना मरोड़ और अजीर्ण में गुणकारी है।
(2) तुलसी के चौथाई चम्मच.बीज पीसकर दूध में मिलाकर पिलाने से दस्त बन्द हो जाते हैं। तुलसी के बीज दूध के स्थान पर पानी में मिलाकर पिलाने से पेचिश ठीक हो जाती है।

उल्टी (Vomiting)-(1) तुलसी की पत्तियों का रस पीने से उल्टी बन्द हो जाती है। पेट के कीड़े (कृमि) मर जाते हैं। शहद और तुलसी का रस मिलाकर चाटने से जी मिचलाना, उल्टी भी बन्द हो जाती है।
(2) तुलसी तथा अदरक का रस (समभाग) एक-एक चम्मच शहद के साथ लेने से उल्टी में लाभ होता है।

संग्रहणी (Collection)-तुलसी के पत्तों का चूर्ण और शक्कर हरेक तीन ग्राम मिलाकर लें।

अजीर्ण, मन्दाग्नि (Indigestion)-(1) 20 पत्ते तुलसी (Basil), 5 कालीमिर्च खाने के बाद चबाने से मन्दाग्नि ठीक हो जाती है। यह परीक्षित है। तुलसी के काढ़े में सेंधा नमक और सोंठ मिलाकर पीने से अजीर्ण ठीक हो जाता है।
(2) तुलसी के नित्य प्रात:कालीन सेवन से पेट के समस्त रोग जैसे—कब्ज, गैस, पेट दर्द, अग्निमन्द आदि दूर हो जाते हैं।

अजीर्ण, अपच (Indigestion, indigestion) (1) एक मुट्ठी भर तुलसी (Basil) के पत्ते, दस ग्राम सोंठ, बीस ग्राम गुड़ सब पीसकर गोलियाँ बना लें। एक-एक गोली नित्य तीन बार खायें।
(2) चौथाई चम्मच काला नमक और तुलसी के 50 पत्ते पीसकर खा जायें और एक गिलास पानी पियें। अपच दूर हो जायेगी।

हिचकी (hiccup)-तुलसी का रस 12 ग्राम, शहद 6 ग्राम दोनों को मिलाकर पीने से हिचकी बन्द हो जाती है।

गले में दर्द (Throat pain)-तेज बोलने से गले में दर्द हो तो तुलसी के 20 पत्ते पीसकर एक चम्मच शहद मिलाकर चाटें। दर्द मिट जायेगा।

घुटनों में दर्द (Knee pain)- तलसी के पत्ते आधी मठी. एक नया पत्ता एरण्ड का, आधा चम्मच नमक लें। सभी को पीसकर गर्म करके घटनों पर दस दिन तक नित्य लेप करें।

Benifits of Basil leaves

यकृत रोग (liver disease)-तुलसी (Basil) के 100 पत्ते एक गिलास पानी में उबालें। इसका तीसरा भाग रहने पर लानकर शहद मिलाकर पिलायें।

यकृत (Liver) एक गिलास पानी में 12 ग्राम तुलसी के पत्ते उबालकर चौथाई पानी रहने पर छानकर पीने से यकृत बढ़ना एवं यकृत के अन्य रोग ठीक हो जाते हैं।

नकसीर (Hemorrhage)-तुलसी का 4 बूंद रस नाक में टपकाने से रक्तस्राव बन्द हो जाता है।

पीनस, नाक में दर्द, घाव, फुसी हो तो तुलसी के सूखे पत्तों को पीसकर सूंघने से लाभ होता है।

सुनने में गड़बड़, कान का दर्द-तुलसी (Basil) के पत्तों का रस गर्म करके चार बूंद कान में डालने से दर्द ठीक हो जाता है। कान बहता हो तो लगातार कुछ दिन डालने से लाभ होता है।

सूजन (swelling)-तुलसी के पत्तों का लेप जहाँ सूजन हो वहाँ करने से सूजन में लाभ होता है। यदि दाँत दर्द से जबड़े पर सूजन हो तो वह भी ठीक हो जाती है।

लू (Lu)गर्मी के मौसम में तेजी से लू चलती है। वैसे भी बुखार, सिरदर्द का भय रहता है, घर से बाहर निकलने से पहले तुलसी के पत्ते खा लें, लू नहीं लगेगी और सिरदर्द नहीं होगा।

रक्तसाव, चक्कर आते हों तो तुलसी के 20 पत्तों को पीसकर | चम्मच शहद में मिलाकर चाटें, लाभ होगा।

सिर चकराना, लू लगना (Dizzy head)- तुलसी (Basil) के पत्तों का रस 5 बूंद, चीनी । चम्मच, पानी आधा कप में मिलाकर पिलाने से लू नहीं लगती और लू लगने पर लाभ होता है। चक्कर नहीं आते।

श्वेत प्रदर (Blennenteria)- (1) तुलसी के पत्तों का रस और शहद समान मात्रा में मिलाकर प्रातः और शाम
को चाटने से लाभ होता है।
(2) तुलसी के रस में जीरा मिलाकर गाय के दूध के साथ सेवन करें।
(3) तुलसी के सौ पत्ते पीसकर 2 चम्मच शहद में मिलाकर नित्य दो बार 25 दिन तक चाटें।

स्त्रियों का अनावश्यक रक्तस्राव तुलसी की जड़ का चौथाई चम्मच चूर्ण एक पान में रखकर खिलाने से रक्तस्राव बन्द हो जाता है। प्रसव पीड़ा के समय तुलसी के पत्तों का रस पिलाने से पीड़ा नहीं होती, मासिक धर्म रुकने पर तुलसी के बीज सेवन करने से लाभ होता है।

रक्त प्रदर तुलसी के पत्तों के रस में मिश्री मिलाकर सेवन करने से रक्त प्रदर ठीक हो जाता है।

गर्भनिरोध (Contraception)- (1) मासिक धर्म बन्द होने के बाद तीन दिन तक एक कप तुलसी के पत्तों का काढ़ा सेवन करने से गर्भ नहीं ठहरता, कोई हानिकारक प्रभाव भी नहीं होता।
(2) तुलसी के पत्ते मिश्री के साथ पीसकर चाटें।

प्रसव वेदना (Labor pains)-प्रसूता स्त्री के कमर से तुलसी (Basil) की जड़ बांधने से प्रसूता स्त्री को प्रसव वेदना का होती है और सन्तान उत्पत्ति में कठिनाई नहीं होती। बांझपन यदि किसी स्त्री का मासिक धर्म होता है. परन्त गर्भ नहीं ठहरता तो मासिक धर्म के दिनों में तुलसी के बीज चबाने से या पानी में पीसकर लेने या काड़ा बनाकर पिलाने से गर्भधारण होगा। यदि गर्भ न रहे तो यह एक साल तक करें। इससे गर्भाशय नीरोग, सबल बनकर गर्भधारण करने योग्य बनता है।

बच्चों के रोग पेट फूलना, दस्त, खांसी, सी, काम, उल्टी होने पर तुलसी के पत्तों के रस में चीनी मिलाकर शर्बत बना लें। इसकी एक छोटी चम्मच पिलायें, ये सब रोग ठीक हो जायेंगे। नियमित प्रयोग से बच्चा स्वस्थ रहता है। बच्चों का उत्तम स्वास्थ्य बनाये रखने के लिए तुलसी, अदरक का रस गर्म करके ठण्डा होने पर शहद मिलाकर पिलायें।

बच्चों के श्वास रोग में तुलसी के पत्तों का रस पाँच बंद, आधा चम्मच शहद में मिलाकर पिलाने से लाभ होता है।

Benifits of Basil leaves

दमा (Asthma)- तुलसी के रस में बलगम को पतला कर निकालने का गुण है। इसलिए यह जुकाम, खाँसी में उपयोगी है। तुलसी का रस, शहद, अदरक का रस, प्याज का रस मिलाकर लेने से दमा, खाँसी में बहुत लाभ होता है।

पेशाब में जलन होने पर (Urination) (1) तुलसी (Basil) के 20 पत्ते चबाने से लाभ होता है।
(2) एक पाव पानी, एक पाव दूध मिलाकर उसमें 2 चम्मच तुलसी के पत्तों का रस मिलाकर नित्य दो बार पीने से पेशाब में जलन नहीं होती।

छाले (Ulcer)-तुलसी और चमेली के पत्ते चबाने से छाले ठीक हो जाते हैं।

दाद (Ringworm)-(1) तुलसी के सी पत्ते लेकर चौथाई चम्मच नमक पर आधा नीबू निचोड़कर, पीसकर दाद पर नित्य दो बार लेप करें।
(2) तुलसी के सौ पते, 5 कली लहसुन, दोनों
को पीसकर दाद पर लेप करें। 15 मिनट बाद धो दें। (3) दाद को साफ करके पहले नीबू का रस लगायें, फिर तुलसी की पत्तियों की चटनी का लेप करें। इनमें से कोई-सा एक प्रयोग कम-से-कम 15 दिन करें। दाद ठीक हो जायेगा।

खाज, दाद पर (Scabies, Ringworm) तुलसी (Basil) के पत्तों का रस और नीबू का रस समान मात्रा में मिलाकर लगाने से ठीक हो जाता है। इससे चेहरे की छाया, मुंहासे, झाई, काले धब्बे व त्वचा के अन्य रोग भी ठीक हो जाते हैं।

मुंहासे, झाइयाँ, काले दागों पर (Acne, pimples, black spots)- तुलसी के पत्तों का चूर्ण मक्खन में मिलाकर चेहरे पर मलें।

फोड़ा, बाल तोड़ (Boil, break hair)- समान मात्रा में तुलसी के पत्ते और पीपल के नये कोमल पत्ते पीसकर फोड़े पर नित्य तीन बार लेप करें।

फोड़े (Boils)- तुलसी के पत्ते पानी में उबालकर उस पानी से फोड़ों को धोयें। ताजा पत्ते पीसकर फोड़ों पर लगायें।

फुंसियां (Pimple)- गर्मी, वर्षा में होने वाली फुसियों पर तुलसी की लकड़ी घिसकर लगायें।

बाला (Bala)-चमड़ी में से लम्बे धागे की तरह कीड़ा निकलता है। इसे बाला या नारू कहते हैं। जहाँ बाला निकलने वाला होता है, वहाँ सूजन आ जाती है। इस सूजन वाले स्थान पर तुलसी (Basil) की जड़ घिसकर लेप करने से बाला 2-3 इंच बाहर आ जाता है। इसे बाँध देना चाहिए। दूसरे दिन फिर इसी तरह लेप करें। इस प्रकार लेप करते रहने से पूरा बाला बाहर निकल आता है। बाला बाहर निकल जाने पर लेप करते रहना चाहिए, जिससे बाला पूरा भर जाये।

घाव (wound)-लसी की पत्तियों को छाया में सुखाकर, बाराक पीसकर, कपड़ से छानकर घाव पर छिड़कने से घाव भर जाता है। इसके पत्तों को पीसकर भी लगा सकते है।

घावों में कीड़े-तुलसी के पत्तों को उबालकर उस पानी से घावों को धोयें। तुलसी (Basil) के पत्तों। का चूर्ण घाबों पर छिड़कें। तुलसी के पत्तों के रस में पतला कपड़ा (गाज) भिगोकर पट्टी बाँध ।

सफेद दाग (Leucoderma),

खुजली की फुसियां, घाव आदि पर तुलसी का तेल नित्य तीन बार लगाने से लाभ होता है। एक जड़ सहित तुलसी का पौधा ले। इसे धो कर मिट्टी आदि साफ कर लें। फिर इसे काटकर आधा किलो पानी, आधा किलो तिल के तेल में मिलाकर धीमी-धीमी आंच पर पकायें। पानी जल जाने और तेल बचने पर मलकर छान लें। यह तुलसी का तेल बन गया, इसे लगायें।

जलना, खुजली, फोड़े, फुसी पर तुलसी का मरहम (Basil ointment on burning, itching, boils, pimples) तुलसी त्वचा रोगों में उपयोगी है। तुलसी के पत्तों का रस 250 ग्राम, नारियल का तेल 250 ग्राम-इन दोनों को मिलाकर धीमी आग पर गर्म करें। जल का भाग जल जाने पर गर्म तेल में ही 12 ग्राम मोम डालकर
हिलायें। यह मरहम तैयार है। ऊपर लिखे सब रोगों में लाभदायक है।

खाज-खुजली (Itching)खाज-खुजली में नीमपत्र एवं तुलसी पत्र मिलाकर खायें भी और लगायें भी सेहत की किरण-संकलक डॉ. सन्तराम चावला, दिल्ली ने तुलसी के निम्न प्रकार से प्रयोग बताए है-

सर्व रोगनाशक तुलसी की प्रकृति गर्म है इसलिए गर्मियों में कम मात्रा में लें। बड़ों के लिए 25 से 100 पत्ते एवं बालकों के लिए 5 से 25 पत्ते एक बार पीसकर शहद या गुड या एक कप दही में मिलाकर नित्य तीन बार 2-3 माह लें।

प्रातः भूखे-पेट पहली मात्रा लें। इस विधि से लेने से कैंसर, गठिया, आर्थराइटिस, ऑस्टियो आर्थराइटिस, स्नायशल. गुदों की खराबी से सूजन, पथरी, सफेद दाग (Leucoderma), रक्त में चर्बी (Blood Cholesterol) बढ़ना, मोटापा, कब्ज, गैस अम्लता (Acidity), पेचिश, कोलाइटिस, प्रोस्टेट के रोग, मंदबुद्धि (Mentally Retarded) बच्चे, सर्दी-जुकाम, वर-प्रदाह (Sinusitis), बार-बार बुखार (Fever) आना, घाव भरना, टूटी हई हड्डियाँ घाव शीघ्र
न भरना, कैंसर, बिवाइयाँ, दमा, श्वास रोग, एलर्जी, आँखें दुखना, विटामिन ‘ए’ और ‘बी’ की कमी, खसरा, सिरदर्द, आधे सिर का दर्द (Migraine) आदि समस्त रोग दूर हो जाते हैं।

Benifits of Basil leaves

नीरोग (Disease)-(1) जो व्यक्ति तुलसी के 6 पत्ते नित्य खा लेता है. वह अनेक रोगों से सरक्षित रहता है तथा सामान्यता रोग स्वतः ही दूर हो जाते हैं।
(2) तलसी की पिसी हई पत्तियों में एक चम्मच शहद मिलाकर नित्य एक बार पीते रहें। इससे आप नीरोग रहेंगे और गालों पर चमक पैदा होगी।

हृदय रोग (heart disease), टॉन्सिलाइटिस, गले के रोग तुलसी की माला पहनने से नहीं होते।

क्षय (T.B.) तुलसी के दस पत्ते, 5 कालीमिर्च पीसकर शहद में मिलाकर नित्य चाटें। T.B. की गाँठं ठीक हो जायेंगी।

नाक में फुसी, दाँत गलना-सी पत्ते तुलसी (Basil) के जरा-सा पानी डालकर पीसकर निचोड़कर रस निकाल लें। इसमें दाल के बराबर कपूर मिलाकर गले हए, काले खड्डे हो रहे दाँतों पर सई से लगाये। छेद में सर्द भर दें। गले हुए दाँतों का दर्द ठीक हो जायेगा। नाक में फंसी कर लगाने से वह ठीक हो जायेगी।

बिजली गिरना (lightening)-नार की बिजली या वर्षा में आकाश से बिजली गिरने से व्यक्ति बेहोश हो गया हो तो मिर. तथा चेहरे पर तुलसी का रस मलने से होश आ जाता है।

विद्युत करंट (Electric current)- विद्युत करंट से ग्रस्त व्यक्ति के ललाट, छाती, हवेली व तलुओं पर तुलसी के पते पीसकर मालिश करें। 

पानी शुद्ध करना (Purify water)- पानी में तुलसी के पत्ते डालने से पानी शुद्ध हो जाता है।

नमस्कार।

Channel Link – https://www.youtube.com/channel/UC0NizkNl5F528dnyY_bwXeg


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